जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद अपनी गहन जांच के दौरान देश में एक बड़ी आतंकी साजिश को विफल करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई के तहत, पुलिस ने दो चिकित्सा पेशेवरों (डॉक्टरों) को गिरफ्तार किया है और उनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री तथा हथियार बरामद किए हैं।
विस्फोटक और हथियारों की बरामदगी
यह जांच श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन वाले पोस्टर लगाने के मामले से शुरू हुई थी। खुफिया जानकारी और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर, पुलिस ने सबसे पहले अनंतनाग निवासी डॉ. अदील अहमद राठर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हिरासत में लिया। डॉ. राठर से पूछताछ के बाद, पुलिस ने अनंतनाग जीएमसी अस्पताल से एक असॉल्ट राइफल भी बरामद की।
जांच के विस्तार के दौरान, पुलिस ने डॉ. राठर के कथित सहयोगी, पुलवामा जिले के कोइल निवासी डॉ. मुजम्मिल शकील की पहचान की। इसके बाद, दिल्ली के निकट फरीदाबाद स्थित एक अस्पताल परिसर में की गई कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी खेप बरामद की, जिसमें लगभग 350 किलोग्राम आरडीएक्स (RDX), एक एके-47 राइफल (AK-47 rifle), और 84 कारतूस शामिल थे। डॉ. अदील अहमद राठर को इस बड़ी आतंकी साजिश का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है।
दिल्ली में रेकी और संभावित लक्ष्य
इतनी बड़ी मात्रा में शक्तिशाली विस्फोटक की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। पुलिस दोनों गिरफ्तार डॉक्टरों से फरीदाबाद में विस्फोटक जमा करने के पीछे के वास्तविक मकसद का पता लगाने के लिए पूछताछ कर रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह संदेह व्यक्त किया गया है कि इस आतंकी नेटवर्क का उद्देश्य दिल्ली जैसे प्रमुख शहर को निशाना बनाना था। आशंका है कि दिल्ली में रेकी (जासूसी) की गई थी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय जैसे संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाने की योजना हो सकती थी।
आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई
पुलिस अब जम्मू-कश्मीर से जुड़े डॉक्टरों के एक व्यापक नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है, जिनके प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने का संदेह है। पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की धारा 7/25 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13, 28, 38 और 39 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस संवेदनशील मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) सहित अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के भी शामिल होने की संभावना है।
