Jimmy Johns
  • November 10, 2025
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भारतीय खाद्य उद्योग की प्रमुख कंपनी हल्दीराम ग्रुप अमेरिकी क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेगमेंट में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी कथित तौर पर अमेरिकी समूह इंस्पायर ब्रांड्स (Inspire Brands) के साथ एक विशेष फ्रेंचाइजी समझौते के लिए बातचीत कर रही है, जिसका उद्देश्य भारत में प्रसिद्ध सैंडविच चेन ‘जिम्मी जॉन’ (Jimmy John’s) को लॉन्च करना है।

पश्चिमी QSR बाज़ार में प्रवेश का लक्ष्य

हल्दीराम के संस्थापक परिवार, अग्रवाल, इस विस्तार के माध्यम से सबवे (Subway) और टिम हॉर्टन्स (Tim Hortons) जैसे वैश्विक ब्रांडों को कड़ी प्रतिस्पर्धा देना चाहते हैं। इस कदम का लक्ष्य भारत के युवा और आकांक्षी उपभोक्ता वर्ग की बढ़ती मांग का लाभ उठाना है, जिनका पश्चिमी कैफे-शैली के प्रारूपों के प्रति अधिक झुकाव है।

Inspire Brands, जो जिम्मी जॉन के स्वामित्व वाली कंपनी है, वह वैश्विक स्तर पर डंकिन’ (Dunkin’) और बास्किन-रॉबिंस (Baskin-Robbins)जैसे ब्रांडों का भी संचालन करती है। Inspire Brands के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, माइकल हेली ने कहा, “जिम्मी जॉन’स 40 वर्षों से गुणवत्तापूर्ण सैंडविच बनाने के लिए जाना जाता है, और अब इसे दुनिया के साथ साझा करने का समय है।”

हल्दीराम्स की व्यावसायिक रणनीति

यह प्रस्तावित नया QSR चेन हल्दीराम के मौजूदा जातीय खाद्य व्यवसाय (Ethnic Food Business) से अलग संचालित होगा, जिसका वर्तमान एफएमसीजी संचालन ‘हल्दीराम स्नैक्स फूड प्राइवेट लिमिटेड’ के तहत किया जाता है।

  • रेस्टोरेंट कारोबार: हल्दीराम का मौजूदा रेस्टोरेंट कारोबार, जिसका मूल्य लगभग ₹2,000 करोड़ है, पूरे भारत में 150 से अधिक आउटलेट संचालित करता है।
  • एफएमसीजी कारोबार: हल्दीराम स्नैक्स फूड ने वित्तीय वर्ष 2024 के लिए ₹12,800 करोड़ का राजस्व और ₹1,400 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया।
  • एकीकरण: अप्रैल 2025 में, कंपनी ने दिल्ली और नागपुर के अपने एफएमसीजी व्यवसायों का विलय करके ‘हल्दीराम स्नैक्स फूड प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक एकल इकाई बनाई। इस कदम को संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग (IPO) से पहले की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
  • अन्य निवेश: हल्दीराम के संस्थापक परिवार के सदस्य कमल अग्रवाल ने हाल ही में अपने फैमिली ऑफिस के माध्यम से Wow! Momo में ₹150 करोड़ का फंडिंग राउंड भी लीड किया था।

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अनुसार, भारत का खाद्य सेवा बाजार वित्तीय वर्ष 2028 तक ₹7.76 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो बढ़ती युवा आबादी और डाइनिंग आउट (बाहर खाना) की संस्कृति से प्रेरित है।