गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए बायो-वॉरफेयर (जैव-युद्ध) से जुड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में, तेलंगाना के एक डॉक्टर सहित तीन संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, जो एक अत्यंत घातक जहर ‘रिसिन’ (Ricin) का उपयोग करके भारत में आतंकी हमला करने की योजना बना रहे थे।
मुख्य गिरफ्तारियां और बरामदगी
एटीएस ने जिन तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, उनमें तेलंगाना के डॉ. अहमद मोइयुद्दीन सैयद (चीन से एमबीबीएस डिग्री धारक), शामली का आज़ाद सुलेमान शेख और लखीमपुर का मोहम्मद सुहैल मोहम्मद सलीम खान शामिल हैं।
डॉ. सैयद इस खतरनाक रिसिन घातक विष (Ricin Lethal Toxin) को तैयार करने में सक्रिय रूप से शामिल था। जांच एजेंसियों ने उनके पास से हथियारों के जखीरे के साथ-साथ 10 लीटर अरंडी का तेल (Castor Oil) भी बरामद किया है, जिसका उपयोग रिसिन बनाने में किया जाता है। पुलिस के अनुसार, यह समूह इस जहर के माध्यम से देश में आतंकी हमला करने की साजिश रच रहा था।
‘रिसिन’ जहर: एक घातक जैविक हथियार
रिसिन अरंडी के बीजों से प्राप्त एक अत्यंत खतरनाक विष है, जिसे अरंडी के तेल उत्पादन के बाद बचे हुए अपशिष्ट पदार्थ से निकाला जाता है। इसे दुनिया के सबसे घातक जैविक और रासायनिक जहरों में से एक माना जाता है।
इसकी घातकता:
- रिसिन की मात्र नमक के एक छोटे दाने जितनी खुराक भी किसी व्यक्ति की जान लेने के लिए पर्याप्त है।
- यह जहर इंजेक्शन, भोजन में मिलाकर या साँस के माध्यम से भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। साँस के द्वारा हवा में फैलने पर यह बड़े पैमाने पर मौत का कारण बन सकता है।
- शरीर में प्रवेश करने के बाद, रिसिन कोशिकाओं में प्रोटीन निर्माण की प्रक्रिया को बाधित कर देता है, जिससे लिवर और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग तुरंत काम करना बंद कर देते हैं और पीड़ित की दर्दनाक मौत हो जाती है।
- सबसे गंभीर तथ्य यह है कि वर्तमान में इस जहर का कोई एंटीडोट (विषनाशक) या प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है।
- रासायनिक हथियारों की श्रेणी में इसे अत्यधिक खतरनाक माना जाता है और इसे रासायनिक हथियार अभिसमय (Chemical Weapons Convention – CWC) की अनुसूची-1 में शामिल कर पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया गया है।
पूर्व में रिसिन का उपयोग
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी रिसिन का उपयोग साजिशों में किया जा चुका है। 2013 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और 2020 में डोनाल्ड ट्रंप को भी रिसिन युक्त पत्र भेजे जाने की कोशिश की गई थी, हालांकि ये साजिशें शुरुआती चरण में ही विफल कर दी गईं थीं।
गुजरात एटीएस द्वारा इस साजिश का समय पर पर्दाफाश करना देश को एक बड़े और मूक खतरे से बचाने में एक महत्वपूर्ण सफलता है।
